द एचडी न्यूज डेस्क : कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरा नाम के राक्षस का वध किया था. इसलिए इस पूर्णिमा को त्रिपुरा पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान और महाकार्तिकी भी कहा जाता है. शास्त्रों के अनुसार यह पूर्णिमा बहुत ही फलदायी मानी जाती है. आज पूरे देश में सिख धर्म के पहले गुरु नानक देव की 551वीं जयंती मनाई जा रही है. इस अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं और हस्तियों ने सिख धर्म के संस्थापक को श्रद्धांजलि देते हुए लोगों को आज के दिन की बधाई दीं.

आज कार्तिक पूर्णिमा है. आप कार्तिक पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर पटना के एनआईटी घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है. लेकिन अगर पिछले बार देखा जाए तो इससे ज्यादा कहीं भीड़ था. इस बार कुछ गंभीर है. यहां भक्तों का कहना है कि और जो गंगा घाट के बाहर मेला की घाट के बाहर में जो रास्ते में काफी संख्या में जो मेला लगा हुआ है. लेकिन मेले में भक्तों की भीड़ कम है और मन है. ऐसा है कि गंगा स्नान के बाद लोग लाइ खरीदते हैं लाइ खाते भी है. कहते हैं कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कार्तिक पूर्णिमा के खास दिन पर जप, तप और दान का विशेष महत्व बताया जाता है.

भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार मत्स्य रूप धारण किया और प्रलय काल के दौरान वेदों की रक्षा की थी. इसके साथ ही भगवान शिव ने इसी तिथि पर त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था. जिससे सभी देवतागण बहुत प्रसन्न हुए थे और भगवान विष्णु ने महादेव को त्रिपुरारी नाम दिया और यह तिथि त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से जानी गई. इस दिन चंद्रोदय के समय भगवान शिव और कृतिकाओं की पूजा करने का विधान है. ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं. इस दिन का शास्त्रों व पुराणों में विशेष महत्व बताया गया है और इसको महापुनित पर्व बताया गया है. इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा, गंगा स्नान आदि नामों से जाना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने का फल पूरे साल गंगा स्नान करने के बराबर मिलता है.
संजय कुमार मुनचुन की रिपोर्ट