पटना : जातीय जनगणना का मुद्दा बढ़ता ही जा रहा है. आए दिन कोई न कोई मंत्री का बयान आते रहता है. वहीं आज जातीय जनगणना को लेकर राज्यसभा सांसद सुशील मोदी जातीय जनगणना ने कहा कि हमने तो पहले भी कहा है कि जातीय जनगणना करना उचित नहीं है. केन्द्र सरकार ने जो कोट में एफिडेविट फाइल किया है. उसमें कहा गया है कि व्यवहारिक नहीं है की केन्द्र सरकार इसको कराएं और इस बार की जनगणना हैण्ड हेल डिवाइज डिजिटल तरीके से होने वाली है. जनगणना की पुरी तैयारी तीन साल पहली ही शुरू कर दी जाती है.
आगे उन्होंने कहा कि उसका मैनुअल छप चुका है, टैइम टेबल बन चुका है और इस देश के अन्दर 2011 में जो आर्थिक जनगणना हुआ उसके अन्तर्गत जो पिछड़ी जातीया है, उसकी संख्या 46 लाख जातीयो की सुची मिली. जो कि इस देश में मुश्किल से 7 से 8 हजार जातीय होंगी. इसीलिए केन्द्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव है और हां अगर कोई राज्य कराना चाहता है तो क्या हो सकता है, जैसे तेलंगाना ने कराया, कर्नाटक में जब सिद्धारमैया की सरकार थी तब हुई.
वहीं उन्होंने कहा कि हां वो बात अलग है जब सिद्धारमैया ने जातीय जनगणना करा कर प्रकाशित नहीं करवाया. वहीं उड़ीसा के सरकार भी तैयारी कर रही हैं. अगर कोई राज्य सरकार कराना चाहे तो वह स्वतंत्र है. केन्द्र ने असमर्थता जाहिर की है और जो राजद के लोग कह रहे हैं कि एक कॉलम जोड़ देना है. तो जोड़ने का सवाल नहीं है क्योंकि ये डिजिटल तरीके से गणना की जानी वाली है.
अनुसूचित जाति और जनजाति की गणना इस लिए होती है कि जो लोकसभा और राज्यसभा में जो आरक्षण मिला है वो आबादी के अनुपात है कि नहीं. इस लिए अगर कोई राज्य सरकार कराना चाहती है तो वो करा सकती है.
संजय कुमार की रिपोर्ट
